परियोजना के बारे में
जलवायु परिवर्तन हिमाचल प्रदेश में ग्रामीण और शहरी दोनों प्रकार की आजीविकाओं के लिए गंभीर खतरा उत्पन्न कर रहा है। इसका सीधा प्रभाव जल संसाधनों, पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं तथा कृषि समुदायों पर पड़ रहा है, जो गरीबी उन्मूलन और सतत विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
यद्यपि राज्य तेज आर्थिक विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है, फिर भी यह पर्यावरणीय स्थिरता और जलवायु संबंधी चुनौतियों से निपटने के लिए प्रतिबद्ध है। ऐसे प्रयासों को समर्थन देने हेतु, भारत सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा राष्ट्रीय अनुकूलन कोष के माध्यम से संवेदनशील राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को सहायता प्रदान की जाती है।
इस पहल के अंतर्गत हिमाचल प्रदेश को अनुकूलन क्षमता को सुदृढ़ करने और आजीविका के अवसरों की सुरक्षा हेतु सहायता प्राप्त हुई है। विशेष रूप से, सिरमौर जिला, जहाँ ग्रामीण जनसंख्या वृद्धि दूसरी सबसे अधिक है, पिछले कुछ दशकों में बार-बार सूखे, नमी की कमी और जल संकट जैसी समस्याओं का सामना कर रहा है, जिसके कारण इसकी अधिकांश तहसीलें अत्यधिक संवेदनशील हो गई हैं।
इन चुनौतियों के समाधान हेतु, जलवायु-स्मार्ट कृषि तकनीकों और सामाजिक अभियांत्रिकी हस्तक्षेपों को सम्मिलित करते हुए एक दीर्घकालिक कार्यक्रम लागू किया गया, जिसमें क्षमता निर्माण, खाद्य सुरक्षा और आजीविका की स्थिरता पर ध्यान केंद्रित किया गया। इस पहल का विशेष लक्ष्य छोटे और सीमांत किसान, जिनमें ग्रामीण महिलाएँ भी शामिल हैं, रहे, ताकि जलवायु के प्रति उनकी संवेदनशीलता कम हो सके और उनकी अनुकूलन क्षमता बढ़ाई जा सके।